Vidrohi Sannyasi (Hindi) : Story of Legend Adi Shankaracharya | Religion & Spirituality | Hinduism | Motivational | Literature | Biographical

Vidrohi Sannyasi (Hindi) : Story of Legend Adi Shankaracharya | Religion & Spirituality | Hinduism | Motivational | Literature | Biographical
Price: ₹400 - ₹225.00
(as of Apr 07,2025 03:47:03 UTC – Details)

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Vidrohi Sannyasi by Rajeev Sharma

Vidrohi SannyasiVidrohi Sannyasi

आदिशंकराचार्य के पास आज के युवाओं के सभी प्रश्नों का उत्तर है, उनकी जिज्ञासाओं और कुंठाओं के भी।

श्री नगर से कामरूप-कामाख्या और कलकत्ता से कोच्चि तक आदिशंकर के नाम की पारसमणि हमारा मार्ग प्रदीप्त करती गई। उस महान् यात्री के पदचिह्न खोजते हुए अनायास ही भारत भर की प्रदक्षिणा कब संपन्न हो गई पता नहीं चला। हर सुधार कालांतर में स्वयं रूढि़ बन जाता है, हर क्रांति को पोंगापंथी बनते हुए और मुक्ति-योद्धाओं को तानाशाह बनते देखना इतिहास की आदत है। वे विद्रोही थे, उन्होंने मानव बलि समेत तत्समय के ढोंग, पाखंड, वामाचार का प्राणपण से विरोध किया। संन्यासी होते हुए उनमें यह कहने का साहस था कि मैं न मूर्ति हूँ, न पूजा हूँ, न पुजारी हूँ, न धर्म हूँ, न जाति हूँ। आदिशंकराचार्य के पास आज के युवाओं के सभी प्रश्नों का उत्तर है, उनकी जिज्ञासाओं और कुंठाओं के भी। उनसे बड़ा प्रबंधन गुरु कौन होगा, जिसने शताब्दियों पहले केरल के गाँव से यात्रा प्रारंभ कर संपूर्ण राष्ट्र की चेतना और जीवन-पद्धति को बदल दिया। जो संन्यासी संसार के सारे अनुशासनों से परे हुआ करते थे, उन्हें अखाड़ों और आश्रमों में संगठित कर अनुशासित और नियमबद्ध कर दिया। बौद्धों और हिंदुओं के संघर्ष को शांत कर दिया। शैवों, वैष्णवों, शाक्तों, गाणपत्यों, सभी को एक सूत्र में पिरो दिया। उस अद्भुत तेजस्वी बालक, चमत्कारी किशोर और सम्मोहक युवा शंकर की यह कथा आपको उनके विख्यात जीवन के अज्ञात प्रसंगों का दिग्दर्शन करा पाएगी, यह इस पुस्तक का विनम्र उद्देश्य है।.

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Rajeev SharmaRajeev Sharma

Rajeev Sharma

राजीव शर्माजन्म : रंगपंचमी 1965 को ‘किरण-निवास’, भिंड (म.प्र.) में।आजीविका : भारतीय प्रशासनिक सेवा में।साहित्यिक : तीन कविता-संग्रह ‘उम्र की इक्कीस गलियाँ’ (2000), ‘धूप के ग्लेशियर’ (2001) तथा ‘प्रिज्म’ (2007)। मंडला जिले पर ‘युगयुगीन मंडला’ (2010)।छायांकन : कान्हा और बांधवगढ़ के जंगलों में सौ से ज्यादा प्रजातियों का छायांकन। गिर के सिंहों, मदुमलाई-बाँदीपुर के बाघों, चंबल के घडि़यालों, सुंदरवन सतपुड़ा, कॉर्बेट, पेंच, मेलघाट सहित दुनिया भर के अभ्यारण्यों का सान्निध्य। छायाचित्र प्रदर्शनी ‘Birds of Bandhavgarh’.अभिरुचियाँ : वन्य जीवन, ग्रामीण विकास, जनजातीय मुद्दों, जल संवर्धन, जैव विविधता, हस्तशिल्प में मैदानी कार्य। विदेश यात्रा : संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, यूरोप।विशेषज्ञता : मानव संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण विकास।शीघ्र प्रकाश्य : ओ…शो (आचार्य रजनीश के जीवन पर) बांधवगढ़ की चिरइयाँ, बांधवगढ़ के राजा बाघ।संप्रति : आयुक्त, हथकरघा एवं हस्तशिल्प।

Swami Dayanand Saraswati by Madhur AthaiyaSwami Dayanand Saraswati by Madhur Athaiya

Swami Dayanand Saraswati by Madhur Athaiya

आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती भारत के प्रख्यात समाज सुधारक; चिंतक और देशभक्त थे। वे बचपन में ‘मूलशंकर’ नाम से जाने जाते थे। महर्षि ने सभी धर्मों में व्याप्त बुराइयों का कड़े शब्दों में खंडन किया और अपने महान् ग्रंथ ‘सत्यार्थप्रकाश’ में उनका विश्लेषण किया। बचपन की एक घटना ने उन्हें उद्वेलित कर दिया और ईश-भक्ति से उनका मोह भंग हो गया; जब उन्होंने देखा कि भगवान् पर चढ़ा भोग चूहे खा रहे हैं; पर भगवान् उन्हें भगाने में अक्षम हैं। जीवन-मृत्यु के प्रश्न उन्हें बचपन से ही मथने लगे थे। माता-पिता उनके विवाह की जुगत लगाने लगे तो सन् 1846 में उन्होंने गृह-त्याग किया और स्वामी विरजानंद को अपना गुरु बनाकर वैदिक साहित्य का अध्ययन किया। शिक्षा व सत्यार्थ पाकर उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और धर्म में व्याप्त बुराइयों का तार्किक खंडन किया। कहते हैं कि एक रहस्यमय घटनाक्रम में इन महान् समाज-सेवी; दार्शनिक और प्रखर वक्ता को पिसा काँच और विष देकर मार दिया गया। समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से पठनीय धर्मध्जवाहक स्वामी दयानंद सरस्वती की प्रेरणाप्रद जीवनी।

Shri Guru Nanak Devji by Dr. Kuldeep Chand AgnihotriShri Guru Nanak Devji by Dr. Kuldeep Chand Agnihotri

Shri Guru Nanak Devji by Dr. Kuldeep Chand Agnihotri

नानक को जानने के लिए; नानक को अपने भीतर अनुभव करना होगा। उन वीरान बियावानों की मानसिक यात्रा करनी होगी जिनकी नानक देवजी ने यथार्थ में यात्रा की थी। सुदूर दक्षिण में धनुषकोटि के किनारे विशाल सागर की उत्ताल लहरों को देखते हुए; उनमें श्रीलंका को जा रहे नानक देव की छवि को अपने मुँदे नेत्रों से देखना होगा। नानक को जानने का यही अमर नानक-मार्ग है। इस पुस्तक में लेखक ने यही करने का प्रयास किया है। नानक देवजी को समझने-बूझने के लिए; उस कालखंड की सभी परतों को उन्होंने एक-एक कर अनावृत्त किया है। यह पुस्तक किसी एक ढर्रे से बँधी हुई नहीं है; बल्कि नानक देवजी के विविधपक्षीय जीवन के ताजा स्नैप्स हैं। इसलिए इस अध्ययन में एक ताजगी है; ताजा हवा के एक झोंके का अहसास। गुरु नानक देवजी से शुरू हुई इस यात्रा के अंतिम अध्याय तक पहुँचते-पहुँचते; रास्ते के सभी पड़ावों की अविछिन्नता एवं वैचारिक निरंतरता को पुस्तक के अंतिम अध्याय में इंगित किया गया है। पुस्तक की उपादेयता विविध प्रसंगों की नवीन युगानुकूल व्याख्या में है।

Jagadguru Adya Shankaracharya by Shivdas PandeyJagadguru Adya Shankaracharya by Shivdas Pandey

Jagadguru Adya Shankaracharya by Shivdas Pandey

शंकराचार्य एक ऐसे शास्त्राचार्य का नाम है; जो संस्कृति-रक्षा को युद्ध मानकर शास्त्रार्थ करता है और जिसका अस्त्र-शस्त्र सबकुछ शास्त्र तथा जिसका युद्ध मात्र शास्त्रार्थ है एवं जिसकी शति हजारो-हजार वर्षों की ऋषि-प्रति-ऋषि एवं तपस्या-प्रति-तपस्या सिद्ध ज्ञान-संपदा है। वह न तो खलीफाओं की तरह युद्ध करता है और न नियोजित बोधिसवों की तरह; न ही जैसा देश; वैसा वेश; वैसा धर्म का सिका चलानेवाले ईसाई पादरियों की तरह। वह शास्त्र के शस्त्र से शास्त्रार्थ का युद्ध लड़ना जानता है—धर्म के क्षेत्र में ज्ञान तथा न्याय के निर्धारित विधानों के सर्वथा अनुरूप। यह युद्ध षड्दर्शनों तथा षड्चक्रों के साधकों के साथ-साथ इन ब्रह्मवादी शैव-दर्शन के तंत्रोन्मुख कश्मीरी शैवों से भी होता है और वह सोलह वर्षों में सभी विवादों का समाधान ढूँढ़कर वैदिक संस्कृति को पुन: स्थापित करता है। शंकराचार्य जैसा आचार्य होना; एक योगसिद्ध-ज्ञानसिद्ध तथा ध्यानसिद्ध आचार्य होना और ऐसे आचार्य का एक सिद्ध जगद्गुरु हो जाने का भी कोई विशेष अर्थ होता है।

PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola 'Yamini'PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola 'Yamini'

PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola ‘Yamini’

परम विशिष्ट आध्यात्मिक विभूतियों में से एक श्री श्री परमहंस योगानंदजी द्वारा दी गई शिक्षाएँ तथा कालजयी विचार धर्म; दर्शन; विज्ञान; मनोविज्ञान; शिक्षा आदि क्षेत्रों के लिए समान रूप से सार्थक और स्तुत्य हैं। उन्होंने विदेशों में क्रिया; योग; विज्ञान तथा अध्यात्म के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय योगदान दिया; उसे भुलाया नहीं जा सकता। पूज्य परमहंस योगानंद ने ‘योगदा सत्संग सोसाइटी’ तथा ‘सेल्फ रियलाइजेशन फैलोशिप’ नामक संस्थाओं की स्थापना की। ये संस्थाएँ अपने जगद्गुरु के संदेशों तथा विचारों को मौलिक व प्रामाणिक रूप में पूरे विश्व में प्रचारित करने के लिए कटिबद्ध हैं। इस पुस्तक को तैयार करने में स्वामीजी की इन्हीं संस्थाओं से प्रकाशित पुस्तकों से मदद ली गई है—विशेष रूप से पूज्य स्वामीजी द्वारा लिखित ‘योगी कथामृत’ से। इस पुस्तक में स्वामी योगानंदजी के विचारों को ही मूर्त रूप प्रदान किया गया है। त्याग; तपस्या; संयम; योग; अध्यात्म से अनुप्राणित पूज्य स्वामी परमहंस योगानंद का अद्भुत चरित्र-चित्रण; जो सामान्य जन को प्रेरित करेगा और एक आदर्श मानव बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan; 1st edition (31 July 2020); Prabhat Prakashan
Language ‏ : ‎ Hindi
Hardcover ‏ : ‎ 216 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 939031559X
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9390315598
Item Weight ‏ : ‎ 413 g
Dimensions ‏ : ‎ 20.32 x 12.7 x 1.27 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Importer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan
Packer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan
Generic Name ‏ : ‎ Book

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