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Santon Ke Prerak Prasang (Hindi) by SURENDRA SINGH NEGI

इस आपाधापी भरे युग में जो व्यक्ति सत्संगों का लाभ नहीं उठा पाते, उन्हें इस पुस्तक के द्वारा बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
हमारा देश संत-महात्माओं एवं ऋषि-मुनियों का देश है। उनकी सांसारिक पदार्थों में आसक्ति नहीं होती। वे सिर्फ जीने भर के लिए जरूरी चीजों का सीमित मात्रा में उपभोग करते हैं। क्रोध, मान, माया और लोभ से संत का कोई प्रयोजन नहीं है। ऐसा सात्त्विक तपस्वी जीवन सबके लिए अनुकरणीय होता है।संत का जीवन जीना साधारण मानव के बस की बात नहीं है। संत-जीवन में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जो लोग आदर्श गृहस्थ धर्म को निभाते हैं, वे धन्य हैं। जो लोग मेहनत से, उचित साधनों से आजीविका अर्जित करते हैं, व्यवहार-कुशल हैं, परहितकारी हैं, खुद जीते हैं और दूसरों को जीने देते हैं, ऐसे मानव भी किसी संत से कम नहीं हैं।प्रस्तुत पुस्तक का प्रत्येक दृष्टांत जीवन के बारे में स्पष्ट दृष्टि देता हुआ अमूल्य संदेश देता है। इस आपाधापी भरे युग में जो व्यक्ति सत्संगों का लाभ नहीं उठा पाते, उन्हें इस पुस्तक के द्वारा बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।संतों के प्रेरणाप्रद जीवन का सार यदि हम जीवन में उतारें तो सुख-संतोष से परिपूर्ण होगा हमारा जीवन।
अनुक्रम
दो शब्द
1. संत की महानता
2. राजा का अभिमान
3. दूध में मलाई
4. संत की दलील
5. अनुकूलता
6. मोह बड़ा दुःखरूप
7. श्रद्धा-भावना
8. चंचल मन
9. दुर्व्यसनों से छुटकारा
20. माँ की महानता
21. पद्धति और शिल्प
22. शिक्षा और संस्कार
23. श्रेष्ठ कौन?
24. अक्लमंद की पहचान
25. गृहस्थ और संन्यासी
26. संत का प्रेम
27. चार दिन की दुनिया
28. आध्यात्मिक कमाई
29. पहले खुद को सुधारो
10. संतोष
11. ईश्वर कहाँ है?
12. संत का हीरा
13. सत्य के मार्ग पर चलो
14. बुरे लोगों पर रहम
15. स्वर्ग की प्राप्ति
16. मेहनत की कमाई
17. प्रेम के आँसू
18. अमीरी-गरीबी
19. ईश्वरीय प्रेम
30. संतों की संगति
31. प्रशंसा और निंदा
32. खोटे सिक्के
33. अतिथि सत्कार
34. आसान उपाय
35. बंधन मुक्त संन्यासी
36. कर्म करो, फल की चिंता मत करो
37. छिद्र वाला पात्र
38. भगवान् पर विश्वास
continue…
Surendra Singh Negi
सुपरिचित लेखक। धार्मिक, पौराणिक विषय पर लेखन-पठन में विशेष रुचि। समाचार-पत्र व पत्रिकाओं में लेख, कहानी आदि के साथ ही अनेक पुस्तकें प्रकाशित।सांस्कृतिक कार्यक्रम, सभा-समारोह तथा सेमिनारों में विशेष रूप से सहभागिता।
अन्य प्रसिद्ध कृतियां।

SANTON KE PRERAK PRASANG
हमारा देश संत-महात्माओं एवं ऋषिमुनियों का देश है। उनकी सांसारिक पदार्थों में आसक्ति नहीं होती। वे सिर्फ जीने भर के लिए जरूरी चीजों का सीमित मात्रा में उपभोग करते हैं। क्रोध; मान; माया और लोभ से संत का कोई प्रयोजन नहीं है। ऐसा सात्त्विक तपस्वी जीवन सबके लिए अनुकरणीय होता है।

Bharat Ke Mahan Sant
संतों की संस्कृति वेदना-संवेदना की संस्कृति है; यथार्थ की धरती पर अवतरित अध्यात्मभाव की संस्कृति है। घोर कष्टों; संकटों; अभावों और घोर अपमानों को सहकर दूसरों को उठाने; खड़ा करने और उन्हें सद्मार्ग दिखाने का महाकर्म है— संतों का जीवन।

Sant Kathayen Marg Dikhayen
समाज में व्यभिचार, हिंसा, ईर्ष्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसा नहीं है कि मनुष्यों के अंदर पलनेवाले इन दुर्भावों को नहीं रोका जा सकता, अवश्य रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए आवश्यकता है ऐसी कथाओं की, जो व्यक्तियों को कम समय में एक बड़ी शिक्षा दें और उन्हें भँवर से बाहर निकालें।

Bharatiya Sanskriti ke Rakshak Sant
इस राजनीतिक पराभव काल में भारत के महान् संतों ने संपूर्ण भारत के गाँव-गाँव में हिंदू जनता को सामाजिक; सांस्कृतिक; धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे स्वनामधन्य पूज्यपाद संतों व उनके जीवन चरित का उल्लेख किया गया है; जिनके कारण भारतीय संस्कृति आज भी संरक्षित है।
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Publisher : Prabhat Prakashan; 1st edition (1 January 2015)
Language : Hindi
Paperback : 144 pages
ISBN-10 : 9351864804
ISBN-13 : 978-9351864806
Reading age : 18 years and up
Item Weight : 400 g
Dimensions : 20.3 x 25.4 x 4.7 cm
Country of Origin : India
Packer : Kashiv Enterprises
Generic Name : Book
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