Sant Kathayen Marg Dikhayen (Hindi Edition)

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Sant Kathayen Marg Dikhayen (Hindi) by Renu Saini

Sant Kathayen Marg Dikhayen (Hindi) by Renu SainiSant Kathayen Marg Dikhayen (Hindi) by Renu Saini

इस पुस्तक में अनेक संतों की ऐसी कथाएँ हैं; जो व्यक्ति को न सिर्फ प्रभावित करेंगी; बल्कि उसके कदम गलत मार्ग पर पड़ने से भी बचाएँगी।

समाज में व्यभिचार; हिंसा; ईर्ष्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसा नहीं है कि मनुष्यों के अंदर पलनेवाले इन दुर्भावों को नहीं रोका जा सकता; अवश्य रोका जा सकता है; लेकिन इसके लिए आवश्यकता है ऐसी कथाओं की; जो व्यक्तियों को कम समय में एक बड़ी शिक्षा दें और उन्हें भँवर से बाहर निकालें।संत हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं; वे हमें सही राह दिखाते हैं। इस पुस्तक में अनेक संतों की ऐसी कथाएँ हैं; जो व्यक्ति को न सिर्फ प्रभावित करेंगी; बल्कि उसके कदम गलत मार्ग पर पड़ने से भी बचाएँगी। कई व्यक्तियों के पास इतना समय नहीं होता कि वे पुस्तकों के बड़े अध्याय या कहानियों को पढ़ पाएँ; इसलिए इस पुस्तक में सरल भाषा में हर कहानी को केवल एक पृष्ठ तक ही समेटने का प्रयास किया गया है। जीवन में सद्गुणों का विकास करने का मार्ग दिखाती संत कथाएँ।

अनुक्रम

प्राक्कथन —Pgs. 5मृदु शस्त्र —Pgs. 11त्याग की सीख —Pgs. 12अति आत्मविश्वास से बचो —Pgs. 13असली ज्ञानी —Pgs. 15बच्चों सी ऊर्जा —Pgs. 16मौन की शक्ति —Pgs. 17मेरी पहचान —Pgs. 18लोभ की गंध —Pgs. 19प्रसन्नता के कारण —Pgs. 20

बालक की चंचलता —Pgs. 31भाग्य का निर्माता —Pgs. 33ज्ञान का अभिमान —Pgs. 34जिह्वा और चंचल मन —Pgs. 35सूफी संत का जवाब —Pgs. 36कर्म के अनुरूप फल —Pgs. 37पहले सुयोग्य बनो —Pgs. 38अच्छाई की प्रवृत्ति —Pgs. 39प्रायश्चित्त क्यों करें —Pgs. 40अवतारी और अज्ञानी —Pgs. 41

दूरदर्शी चाणक्य —Pgs. 21दिगंबर महावीर —Pgs. 22मैले कपड़े की सफाई —Pgs. 23कुसंस्कारी शिष्य —Pgs. 24साधु कौन है —Pgs. 25बुराई या भलाई —Pgs. 26असली दौलत —Pgs. 27आत्मविश्वास का सुख —Pgs. 28ईर्ष्या की सड़न —Pgs. 29मन के काँटे —Pgs. 30

छोटे का सुख —Pgs. 43चार मठ की स्थापना —Pgs. 44नया रोजगार —Pgs. 45गलत चाल —Pgs. 46मोह बंधन —Pgs. 47सामयिक फल —Pgs. 42सर्वोत्तम सौंदर्य —Pgs. 48सेवा और कार्य का अंतर —Pgs. 49ईश्वर की उपासना —Pgs. 50

आगे जारी है…

Smt. Renu SainiSmt. Renu Saini

Smt. Renu Saini

जन्म : 1 अप्रैल

शिक्षा : एम.फिल. (हिंदी)

प्रकाशन :

‘दिशा देती कथाएँ’, ‘बचपन का सफर’, ‘बचपन मुसकाया जब इन्हें सुनाया’, ‘महात्मा गांधी की प्रेरक गाथाएँ’, ‘कलाम को सलाम’, ‘संत कथाएँ मार्ग दिखाएँ’, ‘सक्सेस गीता : सफल जीवन के 125 मंत्र’, ‘डायमंड लाइफ’, ‘जीवन धारा’, ‘मोदी सक्सेस गाथा’, ‘दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरककहानियाँ’, ‘मिशन Impossible’, ‘दिल्ली चलो’, ‘लौहपुरुष सरदार पटेल के प्रेरकप्रसंग’ एवं ‘शास्त्रीजी के प्रेरकप्रसंग ’।

सम्मान :

दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी द्वारा चार बार नवोदित लेखन एवं आठ बार आशुलेखन में पुरस्कृत; ‘बचपन का सफर’ पुस्तक को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य वर्ग के अंतर्गत ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पाँचवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक ‘वितान’ के अंतर्गत कहानी ‘अद्भुत प्रतिभा’ एवं पाठ्यपुस्तक ‘बातों की फुलवारी’ के अंतर्गत ‘आखरदीप’ कहानी का प्रकाशन।

अन्य प्रसिद्ध कृतियां।

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हमारा देश संत-महात्माओं एवं ऋषिमुनियों का देश है। उनकी सांसारिक पदार्थों में आसक्ति नहीं होती। वे सिर्फ जीने भर के लिए जरूरी चीजों का सीमित मात्रा में उपभोग करते हैं। क्रोध; मान; माया और लोभ से संत का कोई प्रयोजन नहीं है। ऐसा सात्त्विक तपस्वी जीवन सबके लिए अनुकरणीय होता है।

Bharat Ke Mahan SantBharat Ke Mahan Sant

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संतों की संस्कृति वेदना-संवेदना की संस्कृति है; यथार्थ की धरती पर अवतरित अध्यात्मभाव की संस्कृति है। घोर कष्‍टों; संकटों; अभावों और घोर अपमानों को सहकर दूसरों को उठाने; खड़ा करने और उन्हें सद्मार्ग दिखाने का महाकर्म है— संतों का जीवन।

Sant Kathayen Marg Dikhayen Sant Kathayen Marg Dikhayen

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समाज में व्यभिचार, हिंसा, ईर्ष्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसा नहीं है कि मनुष्यों के अंदर पलनेवाले इन दुर्भावों को नहीं रोका जा सकता, अवश्य रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए आवश्यकता है ऐसी कथाओं की, जो व्यक्तियों को कम समय में एक बड़ी शिक्षा दें और उन्हें भँवर से बाहर निकालें।

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इस राजनीतिक पराभव काल में भारत के महान् संतों ने संपूर्ण भारत के गाँव-गाँव में हिंदू जनता को सामाजिक; सांस्कृतिक; धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे स्वनामधन्य पूज्यपाद संतों व उनके जीवन चरित का उल्लेख किया गया है; जिनके कारण भारतीय संस्कृति आज भी संरक्षित है।

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ASIN ‏ : ‎ B078B59T2T
Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan (15 December 2017)
Language ‏ : ‎ Hindi
File size ‏ : ‎ 632 KB
Screen Reader ‏ : ‎ Supported
Enhanced typesetting ‏ : ‎ Enabled
Word Wise ‏ : ‎ Not Enabled
Print length ‏ : ‎ 306 pages
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