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Samaj Sudharak Raja Rammohan Roy by Mamta Jha

राजा राममोहन राय भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत और आधुनिक भारत में सामाजिक समरसता के जनक थे। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषाई प्रेस के प्रवर्तक, जन-जागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में नवजागरण युग के पितामह थे। उन्होंने भारत में स्वतंत्रता आंदोलन और पत्रकारिता के कुशल संयोग से दोनों क्षेत्रों को गति प्रदान की। हिंदी के प्रति उनका अगाध समर्पण था। वे रूढ़िवाद और कुरीतियों के विरोधी थे; लेकिन संस्कार, परंपरा और राष्ट्र-गौरव उनकी थाती थे।
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उनका जन्म सन् 1774 में बंगाल में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 15 वर्ष की उम्र तक उन्हें बँगला, संस्कृत, अरबी तथा फारसी भाषाओं का ज्ञान हो गया था। उन्होंने ब्राह्मण समाज की स्थापना की तथा विदेश (इंग्लैंड व फ्रांस) भ्रमण भी किया। राममोहन राय ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी छोड़कर राष्ट्र-सेवा में जुट गए।
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बाल-विवाह, सती-प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, परदा-प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह पर जोर दिया। राजा राममोहन राय ने ‘ब्रह्ममैनिकल मैगजीन’, ‘संवाद कौमुदी’, ‘मिरात-उल-अखबार’, ‘बंगदूत’ जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया। प्रखर चिंतक और दूरद्रष्टा राजा राममोहन राय की सांगोपांग प्रेरक जीवन-गाथा।
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RAJA RAMMOHAN ROY
‘कुछ लोग थे, जो वक्त के साँचे में ढलकर रह गए। कुछ लोग थे, जो वक्त का साँचा बदलकर रख गए।’ ये पंक्तियाँ बुलंद हौसला रखनेवाले उस युगपुरुष के व्यक्तित्व की ओर संकेत करती हैं, जिसमें समय की धारा को मोड़ देने की सामर्थ्य थी। वह युगपुरुष था—राजा राममोहन राय। राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के राधानगर नामक गाँव में एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

Samaj Sudharak Raja Rammohan Roy
उनका जन्म सन् 1774 में बंगाल में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 15 वर्ष की उम्र तक उन्हें बँगला; संस्कृत; अरबी तथा फारसी भाषाओं का ज्ञान हो गया था। उन्होंने ब्राह्म समाज की स्थापना की तथा विदेश (इंग्लैंड व फ्रांस) भ्रमण भी किया। राममोहन राय ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी छोड़कर राष्ट्र-सेवा में जुट गए। बाल-विवाह; सती-प्रथा; जातिवाद; कर्मकांड; परदा-प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह पर जोर दिया। राजा राममोहन राय ने ‘ब्रह्ममैनिकल मैगजीन’; ‘संवाद कौमुदी’; ‘मिरात-उल-अखबार’; ‘बंगदूत’ जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया।
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Mamta Jha
जन्म : 13 जनवरी, 1973 को सरीसाब पाही (मधुबनी), बिहार में।
शिक्षा : हिंदी में स्नातकोत्तर। कृतित्व : लेखिका ने आत्मविकास, समसामयिक विषयों पर पुस्तकें और अनेक महापुरुषों की जीवनियाँ लिखी हैं। पत्र-पत्रिकाओं में नियमित स्तंभ भी प्रकाशित।
Publisher : Prabhat Prakashan; Kids Edition (1 January 2019); New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Language : Hindi
Paperback : 144 pages
ISBN-10 : 9350484099
ISBN-13 : 978-9350484098
Reading age : 18 years and up
Item Weight : 180 g
Dimensions : 21.59 x 13.97 x 0.83 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 1 Count
Importer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Packer : Kashiv Enterprises
Generic Name : Book
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