Mannu Bhandar Ki Lokpriya Kahaniyan: Stories from the Treasury of Mannu Bhandari (Hindi Edition)

Mannu Bhandar Ki Lokpriya Kahaniyan: Stories from the Treasury of Mannu Bhandari (Hindi Edition)
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Mannu Bhandari Ki Lokpriya Kahaniyan by Mannu Bhandari (Author)

Mannu Bhandari Ki Lokpriya Kahaniyan  by Mannu Bhandari (Author) Mannu Bhandari Ki Lokpriya Kahaniyan  by Mannu Bhandari (Author)

Mannu Bhandari Ki Lokpriya Kahaniyan by Mannu Bhandari (Author)

मन्नूजी की कहानियों में से कुछ चुनिंदा कहानियाँ इस संग्रह में संकलित हैं, जिसमें उनकी 1957 में प्रकाशित पहली कहानी ‘मैं हार गई’ से लेकर 2013 में प्रकाशित उनकी कहानी ‘गोपाल को किसने मारा?’ भी शामिल हैं। दोनों कहानियाँ स्त्री से इतर उनके बड़े सामाजिक सरोकारों को दरशाती हैं और उनके उपन्यास ‘महाभोज’ की पृष्ठभूमि को भी छूकर गुजरती हैं।मन्नूजी की पहली प्रकाशित कहानी ‘मैं हार गई’ में भ्रष्ट राजनीति के माहौल में एक रचनाकार की प्रतिबद्धता के साथ-साथ उसके कुछ न कर सकने की अक्षमता की सशक्त कहानी है। कहानी में कथा एक साथ कई स्तरों पर चलती है; जो हो रहा है और जो होना चाहिए के बीच तालमेल बिठाने में भाषा और शिल्प की बुनावट अपने में बेजोड़ है। मन्नूजी की कहानियों काकैनवास बहुत व्यापक है और इसकी विराटता में शिल्प लगातार परिपक्व होता गया है। उनकी कहानियों में व्यंग्य की धार तो उनकी शुरुआती कहानियों से ही दिखाई देने लगती है, पर कालांतर में यह धार बहुत पैनी और बेबाक होती गई है।मन्नू भंडारी का छह दशकों का रचनात्मक सफर इन कहानियों के आलोक में देखा जा सकता है। उनके समय, उनके परिवेश और सामाजिक स्थितियों के बरक्स मन्नू भंडारी की अधिकांश कहानियाँ घरेलू स्थितियों, पारिवारिक विडंबनाओं, पुरुष के सामंती स्वरूप, समय के साथ बदलती सामाजिक स्थितियों में व्यक्ति के अकेले होने और अपने इच्छित प्राप्य तक न पहुँच पाने की मनोदशा की सशक्त कहानियाँ हैं। हम सब जानते हैं कि स्त्री का भीतरी घरेलू ‘स्पेस’ पुरुष के बाहरी व्यापक ‘स्पेस’ के मुकाबले छोटा है। इस छोटे स्पेस में होने के बावजूद लेखिका का कथानक के चुनाव और उसके निर्वाह का अपना एक व्यापक और विश्लेषणात्मक नजरिया है, जो स्त्री की विशिष्ट संवेदनात्मक दृष्टि और लेखक की ईमानदार निगाह से जुड़ा है।

अनुक्रम

भूमिका : छह दशकों की रचनात्मक यात्रामैं हार गईअकेलीमजबूरीछत बनानेवालेरानी माँ का चबूतरानई नौकरीईसा के घर इनसानबंद दराजों का साथकील और कसकस्त्री-सुबोधिनीनायक खलनायक विदूषकत्रिशंकुगोपाल को किसने मारायही सच है

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ASIN ‏ : ‎ B09Q939THS
Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan (7 January 2022)
Language ‏ : ‎ Hindi
File size ‏ : ‎ 1015 KB
Text-to-Speech ‏ : ‎ Enabled
Screen Reader ‏ : ‎ Supported
Enhanced typesetting ‏ : ‎ Enabled
Word Wise ‏ : ‎ Not Enabled
Print length ‏ : ‎ 163 pages

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