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Leo Tolstoy Ki Paanch Superhit Kahaniyan by Leo Tolstoy

टॉल्स्टॉय द्वारा लिखी गयी कहानियों का कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ और ये कहानियां अत्यंत लोकप्रिय भी हुयीं।
लेव तोलस्तोय 9 सितम्बर 1828 – 20 नवंबर 1910) उन्नीसवीं सदी के सर्वाधिक सम्मानित लेखकों में से एक हैं। उनका जन्म रूस के एक संपन्न परिवार में हुआ था। उन्होंने रूसी सेना में भर्ती होकर क्रीमियाई युद्ध (1855) में भाग लिया, लेकिन अगले ही वर्ष सेना छोड़ दी। लेखन के प्रति उनकी रुचि सेना में भर्ती होने से पहले ही जाग चुकी थी। उनके उपन्यास युद्ध और शान्ति (1865-69) तथा आन्ना करेनिना (1875-77) साहित्यिक जगत में क्लासिक रचनाएँ मानी जाती है।धन-दौलत व साहित्यिक प्रतिभा के बावजूद तोलस्तोय मन की शांति के लिए तरसते रहे। अंततः 1890 में उन्होंने अपनी धन-संपत्ति त्याग दी। अपने परिवार को छोड़कर वे ईश्वर व गरीबों की सेवा करने हेतु निकल पड़े। उनके स्वास्थ्य ने अधिक दिनों तक उनका साथ नहीं दिया। आखिरकार 20 नवम्बर 1910 को अस्तापवा नामक एक छोटे से रेलवे स्टेशन पर इस धनिक पुत्र ने एक गरीब, निराश्रित, बीमार वृद्ध के रूप में मौत का आलिंगन कर लिया।लेव निकोलायेविच तोलस्तोय का जन्म मास्को से लगभग 100 मील दक्षिण पैत्रिक रियासत यास्नाया पोल्याना में हुआ था। इनकी माता पिता का देहांत इनके बचपन में ही हो गया था, अत: लालन पालन इनकी चाची तत्याना ने किया। उच्चवर्गीय ताल्लुकेदारों की भॉति इनकी शिक्षा के दीक्षा के लिये सुदक्ष विद्वान् नियुक्त थे। घुड़सवारी, शिकार, नाच-गान, ताश के खेल आदि विद्याओं और कलाओं की शिक्षा इन्हें बचपन में ही मिल चुकी थी। चाची तात्याना इन्हें आदर्श ताल्लुकेदारों बनाना चाहती थी और इसी उद्देश्य से, तत्कालीन संभ्रात समाज की किसी महिला को प्रेमपात्री बनाने के लिये उकसाया करती थीं। युवावस्था में तॉलस्तॉय पर इसका अनुकूल प्रभाव ही पड़ा। पर तॉलस्तॉय का अंत:करण इसे उचित नहीं समझता था। अपनी डायरी में उन्होंने इसकी स्पष्ट भर्त्सना की है।1844 में तॉलस्तॉय कज़ान विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए और 1847 तक उन्होनें पौर्वात्य भाषाओं (eastern languages) और विधिसंहिताओं (कानून) का अध्ययन किया। रियासत के बँटवारे का प्रश्न उपस्थित हो जाने के कारण स्नातक हुए बिना ही इन्हे विश्वविद्यालय छोड़ देना पड़ा। रियासत में आकर इन्होंने अपने कृषक असामियों की दशा में सुधार करने के प्रयत्न किए और सुविधापूर्वक उन्हें स्वतंत्र भूस्वामी हो जाने के लिये कतिपय शर्तें उपस्थित कीं, परंतु असामी वर्ग आसन्न स्वतंत्रता की अफवाहों से प्रभावित था, अत: उसने तॉलस्तॉय की शर्ते ठुकरा दीं। पर यह अफवाह अफवाह ही रही और अंतत: कृषकों को पश्चाताप करना ही हाथ लगा। उनकी कहानी “ए लैंड औनर्स मोर्निग” (1856) इसी घटना पर आधृत है।
ASIN : B07DLQ4CWF
Publisher : Prabhat Prakashan (14 June 2018)
Language : Hindi
File size : 724 KB
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