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KAILAS MANSAROVAR (Hindi) by SUBHADRA RATHORE

इसमें यात्रा का आनंद है; गंतव्य का यथातथ्य विवरण है तो जानकारियों का अभूतपूर्व संकलन भी।
कुछ तो है यहाँ… पश्चिमी तिब्बत के नितांत एकांत में संपूर्ण उच्चता; धवलता एवं दिव्यता के साथ धरा पर अवतरित है अप्रतिम कैलास! अलौकिक ईश्वरीय सत्ता का यों मर्त्यलोक में पदार्पण चकित करता है। नेत्रों पर सहज विश्वास नहीं होता; समक्ष उपस्थत कर्णिकाकार हिमशैल स्वप्न है अथवा यथार्थ? इस पावन भूमि पर दैवीय तथा प्राकृतिक शक्ति की अद्भुत-अनुपम अनुभूति हुआ करती है; कुछ तो है यहाँ…। हजारों वर्षों से भक्त; पर्यटक एवं अनुसंधित्सु यहाँ आते रहे हैं। हिंदू; तिब्बती तथा बौद्ध के अलावा अन्यान्य कई धर्मवालंबियों के लिए यह चुंबकीय क्षेत्र श्रद्धाजनित आकर्षण का केंद्र रहा है। हिंदुओं के लिए कैलास शिवलोक भी है और साक्षात् शिव का स्वरूप भी। कैलास की ही छत्रच्छाया में लहराती हुई पवित्र झील है मानसरोवर; जिसे ब्रह्म के मानस की उत्पत्ति माना जाता है। नीरव-जनशून्य मरुभूम पर स्थत कैलास-मानसरोवर सर्वोच्च तीर्थ मात्र नहीं; यहाँ सर्वत्र छिटका है प्रकृति का अनोखा इंद्रधनुषी रंग; बेहद मोहक; अतीव सुंदर। क्षिति; जल; पावक; गगन और समीर यहाँ अलग ही रूप धरते हैं। नन्हे रजकण; माणिक्य-सी झलकती जलराशि; श्वेताभ कैलास के लिए कैनवास बनता स्वच्छ-निष्कलंक चट नीला आकाश; बर्फीली हवाएँ; सूरज की सीधी पड़ती किरणें; चाँद-तारों की दूधिया छटा और बेजोड़ जलपक्षी—सबकुछ निराले; उपमाएँ यहाँ सर्वथा असमर्थ हैं। कैलास-मानसरोवर का चित्रण-वर्णन असंभव है; नेति-नेति। फिर भी; प्रस्तुत रचना में कैलास-मानसरोवर को शब्दों में सहेजने की ईमानदार कोशिश की गई है। इसमें यात्रा का आनंद है; गंतव्य का यथातथ्य विवरण है तो जानकारियों का अभूतपूर्व संकलन भी। कैलास-मानसरोवर दुर्गम स्थल है; अस्तु इस पर साहित्य का अभाव भी बना हुआ है। इसकी पूर्ति की दृष्ट से यह ग्रंथ विशेष महत्त्व रखता है। पाठक आस्तक हों अथवा नास्तक; भक्त हों अथवा जिज्ञासु पर्यटक; यह कृति उन्हें उनकी भाव-दृष्ट के अनुसार अवश्य तृप्ति प्रदान करेगी।
अन्य प्रसिद्ध कृतियां।

Kailas Mansarovar
पश्चिमी तिब्बत के नितांत एकांत में संपूर्ण उच्चता, धवलता एवं दिव्यता के साथ धरा पर अवतरित है अप्रतिम कैलास. अलौकिक ईश्वरीय सत्ता का यों मर्त्यलोक में पदार्पण चकित करता है। नेत्रों पर सहज विश्वास नहीं होता, समक्ष उपस्थत कर्णिकाकार हिमशैल स्वप्न है अथवा यथार्थ? इस पावन भूम पर दैवीय तथा प्राकृतिक शक्ति की अद्भुत-अनुपम अनुभूति हुआ करती है; कुछ तो है यहाँ। हजारों वषोर्ं से भक्त, पर्यटक एवं अनुसंधित्सु यहाँ आते रहे हैं। हिंदू, तिब्बती तथा बौद्ध के अलावा अन्यान्य कई धमर्ावलंबियों के लिए यह चुंबकीय क्षेत्र श्रद्धाजनित आकर्षण का केंद्र रहा है।

Mata Vaishno Devi
जम्मू एवं कश्मीर की आध्यात्मिक गरिमा तथा इसके प्राकृतिक सौंदर्य के कारण ही संसार भर में इसे विशेष स्थान प्राप्त है। जम्मू एवं कश्मीर में भगवान् शिव तथा माता भवानी के अनेक तीर्थस्थल हैं; जिनमें सर्वश्रेष्ठ भगवान् शिव व माता पार्वती की तपस्या-स्थली बाबा अमरनाथ की गुफा कश्मीर के उत्तर में तथा माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा जम्मू के उत्तर की ओर शिवालिक पर्वत-शृंखला में त्रिकुटा पर्वत के मध्य चोटी की कंदराओं में अति-रोमांचकारी दिव्य पिंडियों के रूप में विराजमान है।

Amarnath Yatra
अमरनाथ-यात्रा के दौरान, जब प्रकृति का अनुपम सौंदर्य, अनायास उद्घाटित होता है, तभी यह समझ आता है कि हिंदू-परंपरा में सौंदर्य को सत्य और शिव के समकक्ष क्यों स्थान दिया गया है! यों ही यात्रा में तीर्थयात्रियों की अप्रतिम श्रद्धा, सेना की चुस्ती और स्थानीय-कश्मीरियों के अकल्पनीय-सहयोग से एक शुभ और संगीतमय वातावरण निर्मित हो जाता है। यहाँ शुभ से मिलन है। अमरनाथ-यात्रा भारत की आत्मा का गहन अवलोकन भी है। भारत सत्य के प्रयोग की अनूठी भूमि रही है। यहाँ सत्य की गहरी प्यास देखी जा सकती है। अमरनाथ-यात्रा इसकी बानगी प्रस्तुत करती है।
ASIN : B0757113LF
Publisher : Prabhat Prakashan (29 August 2017)
Language : Hindi
File size : 894 KB
Text-to-Speech : Enabled
Screen Reader : Supported
Enhanced typesetting : Enabled
Word Wise : Not Enabled
Print length : 118 pages
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