Jhansi Ki Rani (Hindi) : The Legendary Queen’s Battle for Freedom | Novel | Courage & Patriotism | Historical Fiction | Rani Lakshmibai | Hindi Literature | Indian Writing

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Jhansi Ki Rani by Vrindavan Lal Verma

Jhansi Ki Rani by Vrindavan Lal VermaJhansi Ki Rani by Vrindavan Lal Verma

रानी स्वराज्य के लिए लड़ीं, स्वराज्य के लिए मरीं और स्वराज्य की नींव का पत्थर बनीं।

रानी ने घोड़े की लगाम अपने दाँतों में थामी और दोनों हाथों से तलवार चलाकर अपना मार्ग बनाना आरंभ कर दिया। रानी की दुहत्थु तलवारें आगे का मार्ग साफ करती चली जा रही थीं। रानी के साथ केवल चार सरदार और उनकी तलवारें रह गईं। रानी ने देशमुख की सहायता के लिए सुंदर को इशारा किया और स्वयं संगीनबरदारों को दोनों हाथों की तलवारों से खटाखट साफ करके आगे बढ़ने लगीं। एक संगीनबरदार की हूल रानी के सीने के नीचे पड़ी। उन्होंने उसी समय तलवार से उस संगीनबनदार को खतम किया। हूल करारी थी, परंतु आँतें बच गईं। रानी ने सोचा, स्वराज्य की नींव बनने जा रही हूँ। रानी के खून बह निकला। —इसी उपन्यास से अदम्य साहस, शौर्य और देशभक्ति की प्रतिमूर्ति झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पर केंद्रित इस उपन्यास में बाबू वृंदावनलाल वर्मा ने तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिवेश का ऐसा सजीव चित्रण किया है मानो पूरा घटनाक्रम हमारी आँखों के सामने हो रहा हो। झाँसी की रानी का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। रानी स्वराज्य के लिए लड़ीं, स्वराज्य के लिए मरीं और स्वराज्य की नींव का पत्थर बनीं। अद्भुत, प्रेरणाप्रद, पठनीय ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति!

Vrindavan Lal VermaVrindavan Lal Verma

श्री वृंदावनलाल वर्मा

मूर्द्धन्य उपन्यासकार श्री वृंदावनलाल वर्मा का जन्म 9 जनवरी, 1889 को मऊरानीपुर ( झाँसी) में एक कुलीन श्रीवास्तव कायस्थ परिवार में हुआ था । इतिहास के प्रति वर्माजी की रुचि बाल्यकाल से ही थी । अत: उन्होंने कानून की उच्च शिक्षा के साथ-साथ इतिहास, राजनीति, दर्शन, मनोविज्ञान, संगीत, मूर्तिकला तथा वास्तुकला का गहन अध्ययन किया । ऐतिहासिक उपन्यासों के कारण वर्माजी को सर्वाधिक ख्याति प्राप्‍त हुई । उन्होंने अपने उपन्यासों में इस तथ्य को झुठला दिया कि ‘ ऐतिहासिक उपन्यास में या तो इतिहास मर जाता है या उपन्यास ‘, बल्कि उन्होंने इतिहास और उपन्यास दोनों को एक नई दृष्‍ट‌ि प्रदान की । आपकी साहित्य सेवा के लिए भारत सरकार ने आपको ‘ पद‍्म भूषण ‘ की उपाधि से विभूषित किया, आगरा विश्‍वविद्यालय ने डी.लिट. की मानद् उपाधि प्रदान की । उन्हें ‘ सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार ‘ से भी सम्मानित किया गया तथा ‘ झाँसी की रानी ‘ पर भारत सरकार ने दो हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया । वर्माजी के अधिकांश उपन्यासों का प्रमुख प्रांतीय भाषाओं के साथ- साथ अंग्रेजी, रूसी तथा चैक भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है ।

अन्य प्रसिद्ध कृतियाँ

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बलिदानों की धरती भारत में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने रक्त से देशप्रेम की अमिट गाथाएँ लिखीं। यहाँ की ललनाएँ भी इस कार्य में कभी किसी से पीछे नहीं रहीं। इन्हीं में से एक नाम है— झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई। उन्होंने न केवल भारत की, बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। उनका जीवन स्वयं में वीरोचित गुणों से भरपूर, अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा है।

Jhansi Ki Rani LaxmibaiJhansi Ki Rani Laxmibai

Jhansi Ki Rani Laxmibai

This book should provide moral and mental strength to Indian women; as she herself was an example of women’s empowerment. We should try to inculcate some; if not whole aspect of her personality to make ourselves; worthy of our birth. This book is a tribute to Khub Ladi Mardani; Woh Toh Jhansi Wali Rani Thi. She lived a very short life; but her life continues to motivate even today and will motivate the generations to come.

Jhansi Ki RaniJhansi Ki Rani

Jhansi Ki Rani

रानी ने घोड़े की लगाम अपने दाँतों में थामी और दोनों हाथों से तलवार चलाकर अपना मार्ग बनाना आरंभ कर दिया। रानी की दुहत्थु तलवारें आगे का मार्ग साफ करती चली जा रही थीं। रानी के साथ केवल चार सरदार और उनकी तलवारें रह गईं। रानी ने देशमुख की सहायता के लिए सुंदर को इशारा किया और स्वयं संगीनबरदारों को दोनों हाथों की तलवारों से खटाखट साफ करके आगे बढ़ने लगीं।

Rani LaxmibaiRani Laxmibai

Rani Laxmibai

Laxmi Bai was born on 19th November; 1835 in Kashi. Her father was Moropant Tambe and her mother was Bhagirathi Bai. Her father was the Chief Counsellor to Chimaji Appa; brother of the last Peshwa; Baji Rao II. Her mother Bhagirathi Bai was a simple; modest; beautiful and intelligent lady.

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Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan; 1st edition (1 January 2019)
Language ‏ : ‎ Hindi
Hardcover ‏ : ‎ 349 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 9351868222
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9351868224
Item Weight ‏ : ‎ 458 g
Dimensions ‏ : ‎ 20.3 x 25.4 x 4.7 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Packer ‏ : ‎ Kashiv Enterprises
Generic Name ‏ : ‎ Book

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