Emergency Ki Inside Story (National Emergency in India: Case That Shook India) Indira Gandhi The ‘Emergency’ and Indian Democracy in Hindi

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(as of Mar 23,2025 22:11:39 UTC – Details)

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Emergency Ki Inside Story by Kuldip Nayar

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इन सबकी शुरुआत उड़ीसा में 1972 में हुए उप-चुनाव से हुई। लाखों रुपए खर्च कर नंदिनी को राज्य की विधानसभा के लिए चुना गया था।

गांधीवादी जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के सामने उठाया। उन्होंने बचाव में कहा कि कांग्रेस के पास इतने भी पैसे नहीं कि वह पार्टी दफ्तर चला सके। जब उन्हें सही जवाब नहीं मिला, तब वे इस मुद्दे को देश के बीच ले गए।एक के बाद दूसरी घटना होती चली गई और जे.पी. ने ऐलान किया कि अब जंग जनता और सरकार के बीच है। जनता—जो सरकार से जवाबदेही चाहती थी और सरकार—जो बेदाग निकलने की इच्छुक नहीं थी।’ख्यातिप्राप्त लेखक कुलदीप नैयर इमरजेंसी के पीछे की सच्ची कहानी बता रहे हैं। क्यों घोषित हुई इमरजेंसी और इसका मतलब क्या था, यह आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि तब प्रेरणा की शक्ति भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिली थी और आज भी सबकी जबान पर भ्रष्टाचार का ही मुद्दा है।एक नई प्रस्तावना के साथ लेखक वर्तमान पाठकों को एक बार फिर तथ्य, मिथ्या और सत्य के साथ आसानी से समझ आनेवाली विश्लेषणात्मक शैली में परिचित करा रहे हैं। वह अनकही यातनाओं और मुख्य अधिकारियों के साथ ही उनके काम करने के तरीके से परदा उठाते हैं। भारत के लोकतंत्र में 19 महीने छाई रही अमावस पर रहस्योद्घाटन करनेवाली एक ऐसी पुस्तक, जिसे अवश्य पढ़ना चाहिए।

अनुक्रम

मेरी बाततानाशाही की ओरस्याह होता अँधेरासुरंग का अंतफैसलामारुतिसेंसरशिप के दिशानिर्देशप्रकाशन के लिए नहीं (गोपनीय)प्रकाशन हेतु नहींप्रकाशन हेतु नहींसामान्य मार्गदर्शनप्रेस के लिए सामान्य दिशानिर्देश

Kuldip Nayar

वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सांसद कुलदीप नैयर भारत के जाने-माने और व्यापक रूप से सिंडिकेटेड पत्रकार हैं।उनका जन्म 1923 में सियालकोट में हुआ और अपने परिवार के साथ बँटवारे के समय दिल्ली आने से पहले उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत उर्दू अखबार ‘अंजाम’ के साथ की और कुछ समय तक अमेरिका में रहने के बाद लाल बहादुर शास्त्री तथा गोविंद बल्लभ पंत के सूचना अधिकारी भी रहे। नैयर आगे चलकर ‘द स्टेट्समैन’ के स्थानीय संपादक और भारतीय समाचार एजेंसी यू.एन.आई. के प्रबंध संपादक भी रहे। वे पच्चीस वर्षों तक ‘द टाइम्स’ के संवाददाता रहे और बाद में वी.पी. सिंह की सरकार के समय इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त भी रहे।

प्रेस की आजादी के लिए लड़ते हुए इमरजेंसी के दौरान उन्हें कैद कर लिया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों और मानवाधिकारों पर उनकी भूमिका ने अनेक देशों में उन्हें सम्मान और प्यार दिलाया। एक दर्जन से भी अधिक पुस्तकों के लेखक नैयर के साप्ताहिक स्तंभ पूरे दक्षिण एशिया में पढ़े जाते हैं।

अन्य प्रसिद्ध कृतियाँ

Emergency ka Kahar aur Censor ka ZaharEmergency ka Kahar aur Censor ka Zahar

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इस दौरान विपक्ष के प्रायः सभी प्रमुख नेताओं और हजारों नागरिकों को बिना मुकदमा चलाए जेल में डाल दिया गया था। इनमें करीब 250 पत्रकार भी थे। लोगों को अनेक ज्यादतियों और पुलिस जुल्म का सामना करना पड़ा था। अखबारों के समाचारों पर कठोर सेंसर लगा दिया गया था। यह इमरजेंसी का ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। जो काम अंग्रेजों ने नहीं किया था, वह इंदिरा गांधी की सरकार ने कर दिखाया।

Emergency Ki Inside StoryEmergency Ki Inside Story

Emergency Ki Inside Story

ख्यातिप्राप्त लेखक कुलदीप नैयर इमरजेंसी के पीछे की सच्ची कहानी बता रहे हैं। क्यों घोषित हुई इमरजेंसी और इसका मतलब क्या था, यह आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि तब प्रेरणा की शक्ति भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिली थी और आज भी सबकी जबान पर भ्रष्टाचार का ही मुद्दा है। एक नई प्रस्तावना के साथ लेखक वर्तमान पाठकों को एक बार फिर तथ्य, मिथ्या और सत्य के साथ आसानी से समझ आनेवाली विश्लेषणात्मक शैली में परिचित करा रहे हैं।

Aapaatkaal Mein GujaratAapaatkaal Mein Gujarat

Aapaatkaal Mein Gujarat

संघर्षकाल में भूमिगत कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए सत्ताधीशों की आँखों तले किस प्रकार से सुचारु व्यवस्था स्थापित और संचालित की गई, संचार सूत्र किस प्रकार कार्य करते थे—ये तमाम जानकारियाँ पहली बार इस पुस्तक के माध्यम से उजागर हुई हैं।

AapaatnamaAapaatnama

Aapaatnama

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल के जख्म बड़े गहरे हैं। ‘आपातनामा’ उस काली रात की दास्तान है; जिसने उन्नीस महीने तक प्रजातंत्र के सूर्य को उगने ही नहीं दिया। सत्ता का नशा कैसे भ्रष्ट व्यक्तियों को जन्म देता है; यह ‘आपातनामा’ उपन्यास के कथानक से झलकता है। कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; नौकरशाहों और नेताओं के पास बंदी बना ली गई थी।

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ASIN ‏ : ‎ 9352663578
Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan; First Edition (1 January 2020); New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Language ‏ : ‎ Hindi
Paperback ‏ : ‎ 232 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 9789352663576
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9352663576
Item Weight ‏ : ‎ 280 g
Dimensions ‏ : ‎ 21.59 x 13.97 x 1.3 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Net Quantity ‏ : ‎ 1 Count
Importer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan Pvt. Ltd., 4/19, Asaf Ali Raod, New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Packer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Generic Name ‏ : ‎ Book

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