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Chune Hue Vidyalaya Geet (Hindi) by ACHARYA MAYARAM ‘PATANG’


ये गीत छात्रों-अध्यापकों को उस अवसर विशेष के भावों में सराबोर होने की क्षमता रखते हैं।
गीतों का बहुत बड़ा महत्त्व है। कहानी की अपेक्षा गीत किसी विषय को संप्रेषित करने से अधिक सफल हैं। विद्यालयों यें विभिन्न अवसरों यथा—महापुरुषों की जयंतियों; राष्ट्रीय पर्वों और अन्य उत्सवों पर गीत गाने की परंपरा है। ये गीत छात्रों-अध्यापकों को उस अवसर विशेष के भावों में सराबोर होने की क्षमता रखते हैं। प्रसिद्ध कवियों के ये चुनी हुए विद्यालय गीत सभी पाठकों के जीवन में संस्कार; उल्लास और आनंद का संचार करेंगे; हमारा विश्वास है।
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Shreshtha Schooli Geet
प्रायः विद्यालय स्तर पर एक ऐसी उपादेय पुस्तक का अभाव सदैव खटकता रहा है, जो विद्यालय में मनाए जानेवाले उत्सवों की जानकारी तथा उनसे संबंधित गीत एवं कविताओं आदि की सामग्री प्रदान कर सके। प्रस्तुत पुस्तक में छात्रों के नैतिक उत्थान को ध्यान में रखकर पर्व-त्योहार तथा जयंतियों के अनुसार कुछ गीत, कविताएँ आदि संकलित की गई हैं।

Saraswati Vandana Shatak
पुस्तक में कुल सत्तानबे प्रतिष्ठित कवियों की चुनी हुई वाग्देवी माँ सरस्वती की वंदनाएँ हैं । ‘ सरस्वती वंदना शतक ‘ में संकलित सरस्वती चालीसा; सरस्वती महिम्न स्तोत्र और सरस्वती सहस्रनाम पुस्तक की उपादेयता को बढ़ा रहे हैं । भन्न- भन्न लय -छंदों में रचित इन वंदनाओं का वशिष्ट सांगीतिक महत्त्व है।

Chune Hue Vidyalaya Geet
विद्यालयों यें विभिन्न अवसरों यथा—महापुरुषों की जयंतियों; राष्ट्रीय पर्वों और अन्य उत्सवों पर गीत गाने की परंपरा है। ये गीत छात्रों-अध्यापकों को उस अवसर विशेष के भावों में सराबोर होने की क्षमता रखते हैं। प्रसिद्ध कवियों के ये चुनी हुए विद्यालय गीत सभी पाठकों के जीवन में संस्कार; उल्लास और आनंद का संचार करेंगे; हमारा विश्वास है।

Chune Hue Rashtriya Geet
भारतीय कवि और साहित्यकार प्रारम्भ से ही राष्ट्रीयता की पवित्र भावना को अपने काव्य औैर चिंतन का विषय बनाते रहे हैं, जब-जब भी आवश्यकता हुई है, कवियों ने वीरों की शिराओं में बहते रक्त की गति को तीव्र करने के लिए ओज और वीरता के गीत गाए हैं ताकि शत्रु की ललकार को अपने लिए चुनौती मानकर वे राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में अपना सर्वस्व होम कर दें। —इसी पुस्तक से
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Acharya Mayaram ‘Patang’
जन्म : 26 जनवरी, 1940; ग्राम नवादा, डा. गुलावठी, जिला बुलंदशहर। शिक्षा : एम.ए. (दिल्ली), प्रभाकर, साहित्य रत्न, साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री। कृतित्व : ‘गीत रसीले’, ‘गीत सुरीले’, ‘चहकीं चिडि़याँ’ (कविता); ‘अच्छे बच्चे सीधे सच्चे’, ‘चरित्र निर्माण’, ‘सदाचार सोपान’, ‘पढ़ै सो ज्ञानी होय’ (नैतिक शिक्षा); ‘व्याकरण रचना’ (चार भाग), ‘ऑस्कर व्याकरण भारती’ (आठ भाग), ‘भाषा माधुरी प्राथमिक’ (छह भाग), ‘बच्चे कैसे हों?’, ‘शिक्षक कैसे हों?’, ‘ (शिक्षण साहित्य); ‘पढ़ैं नर-नार, मिटे अँधियार’ (गद्य); ‘श्रीराम नाम महिमा’, ‘मिलन’ (खंड काव्य); ‘सरस्वती वंदना शतक’, ‘हमारे विद्यालय उत्सव’, ‘श्रेष्ठ विद्यालय गीत’, ‘चुने हुए विद्यालय गीत’ (संपादित); ‘गीतमाला’, ‘गुंजन’, ‘उद्गम’, ‘तीन सौ गीत’, ‘कविता बोलती है’ (गीत संकलन)।सम्मान : 1996 में हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा सम्मानित; 1997 में दिल्ली राज्य सरकार द्वारा सम्मानित।
संप्रति : ‘सेवा समर्पण’ मासिक में लेखन तथा परामर्शदाता, राष्ट्रवादी साहित्यकार संघ (दि.प्र.) के अध्यक्ष; संपादक ‘सविता ज्योति’।
अन्य प्रसिद्ध लेखकों की कृतियां भी इसमें सम्मिलित हैं।
ASIN : B01MQ1U7L4
Publisher : Prabhat Prakashan (1 January 2013)
Language : Hindi
File size : 3000 KB
Text-to-Speech : Enabled
Screen Reader : Supported
Enhanced typesetting : Enabled
Word Wise : Not Enabled
Print length : 192 pages
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