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BHARAT KA ITIHAS by Yogendra Prasad (Author)

मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, इतिहास प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
किसी भी देश के पुनःनिर्माण में उसे अपने अतीत की जानकारी का होना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य होता है। अतीत की ईंट और वर्तमान के चूने-गाड़े से ही भविष्य का महल निर्मित होता है। जिस देश का अतीत जितना शानदार होगा उसका भविष्य उतना ही सुरक्षित रहेगा। इतिहास उसी अतीत का दर्पण होता है। अतीत से सबक लेकर ही हम वर्तमान को सजाते है, भविष्य को सँवारते है। मेकाले ने कहा था किसी देश को गुलाम बनाना हो तो सबसे पहले उसके इतिहास को नष्ट कर दो। हमारा देश इसका भुक्तभोगी रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय में छह महीने तक लगी आग इसका प्रमाण है। स्पष्ट है हमारे देश का अतीत जितना शानदार था वर्तमान उतना ही पतित है और भविष्य अंधकार से अच्छादित।वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक माहौल में हम अपने इतिहास को नजरअंदाज करने लगे हैं। आज निचले वर्ग के पाठ्यक्रम में भी इतिहास एक स्वतंत्र विषय के रूप में नहीं रह गया। उसे सामाजिक विज्ञान का एक छोटा सा अंश बना दिया गया है। फलतः छात्रों को अपने देश के इतिहास से पूरा परिचय नहीं हो पाता। वे अपने पूर्वजों की आन, बान और शान से, उनके त्याग और बलिदान से उनकी शूरता एवं वीरता से परिचित नहीं हो पा रहे हैं। उनमें राष्ट्रीयता की भावना का लोप होने लगा है। यह स्थिति चिंताजनक है। सरकार, शिक्षक सबका दायित्व है कि छात्रों में इतिहास-प्रेम जगाने का प्रयास करें।भारतीय इतिहास की यह पुस्तक मैंने इसी भावना से प्रेरित होकर लिखी है। मैंने इसमें मुख्य रूप से मुगलकालीन एवं ब्रिटिशकालीन भारत की राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दशाओं पर प्रकाश डालने का एक छोटा सा प्रयास किया है। मैंने छात्रों को यह बताने का प्रयास किया है कि हमारे इतिहास ने कहाँ-कहाँ चूक की है, जिसका लाभ उठाकर विदेशियों ने कितनी बार हमारे सोने की चिडि़या के पर कुतरने की कोशिश की है। फिर भी हम अपनी अस्मिता को बचाए रखा हैं। पुस्तक की सफलता या विफलता तो पाठकों के निर्णय पर है।अंत में मैं उन सभी विद्वानों के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ, जिनकी पुस्तकों से मैंने कहीं-कहीं थोड़ी मदद ली है।
अनुक्रम
दो शब्द
1. मुगल-अफगान संघर्ष
2. मुगल साम्राज्य का विस्तार : अकबर
3. मुगल साम्राज्य का विस्तार : जहाँगीर
4. औरंगजेब (सन् 1658-1707)
5. मुगल और राजपूत
6. मराठों का उदय
7. मुगल और उत्तरी-पश्चिमी सीमा
8. मुगल और सिख
9. मुगलकालीन शासन, समाज और संस्कृति
10. मुगल साम्राज्य का पतन
11. पेशवाओं का उदय
12. यूरोपीय जातियों का आगमन
13. अंग्रेजी राज्य की स्थापना
14. ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार और संगठन
15. ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार
16. भारतीय शासन का विकास (सन् 1757-1858 ई.)
17. आर्थिक परिवर्तन
18. सन् 1857 ई. का विद्रोह
19. राष्ट्रीय आंदोलन
20. भारत में उत्तरदायी शासन का विकास
21. धार्मिक और सामाजिक सुधार
22. भारतीय देशी राज्य
23. भारत का संविधान
THE AUTHOR
Yogendra Prasad
योगेन्द्र प्रसाद जन्म : जनवरी, 1939 शिक्षा : एम.ए.डिप.एड. सेवा अवधि : (1960 से 1999 तक) शिवनन्दन प्रसाद मंडल इंटर स्कूल, मधेपुरा (बिहार)। उच्च विद्यालय धवौली सहरसा (बिहार)।प्रकाशित पुस्तकें : ‘विश्व इतिहास प्रश्नोत्तरी’, ‘तत्कालीन हिंदी साहित्य प्रश्नोत्तरी’।स्थायी पता : को ऑपरेटिव कॉलोनी, पूर्णिया (बिहार)।

BHARAT KA ITIHAS
वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक माहौल में हम अपने इतिहास को नजरअंदाज करने लगे हैं। आज निचले वर्ग केपाठ्यक्रम में भी इतिहास एक स्वतंत्र विषय के रूप में नहीं रह गया। उसे सामाजिक विज्ञान का एक छोटा सा अंश बना दिया गया है। फलतः छात्रों को अपने देश के इतिहास से पूरा परिचय नहीं हो पाता। वे अपने पूर्वजों की आन, बान और शान से, उनके त्याग व बलिदान से उनकी शूरता एवं वीरता से परिचित नहीं हो पा रहे हैं। उनमें राष्ट्रीयता की भावना का लोप होने लगा है। यह स्थिति चिंताजनक है। सरकार, शिक्षक सबका दायित्व है कि वे छात्रों में इतिहास प्रेम जगाने का प्रयास करें।

VISHWA KA ITIHAS by Yogendra Prasad (Author)
इतिहास अतीत की घटनाओं का तथ्यात्मक वर्णन मात्र नहीं है, अपितु यह मानव केसुंदर भविष्य के निर्माण में भी अत्यंत सहायक है। इस प्रकार इतिहास हमारा पथ-प्रदर्शक है। ‘विश्व का इतिहास’ नामक इस पुस्तक में मानव सभ्यता केआरंभ से लेकर वर्तमान तक का विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। जैसा कि हम जानते हैं, इतिहास एक वृहद् विषय है तथा इसका आंकलन विभिन्न पक्षों, यथा सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक इत्यादि को दृष्टिगत रखकर किया जाता है। जब हम विश्व के इतिहास की बात करते हैं तो इसे लिखना एक चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि इसमें घटनाओं की महत्ता को देखते हुए उनका चयन करना होता है।
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Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd. (30 June 2021); Prabhat Prakashan Pvt. Ltd., 4/19, Asaf Ali Raod, New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Language : Hindi
Paperback : 368 pages
ISBN-10 : 9390600103
ISBN-13 : 978-9390600106
Item Weight : 380 g
Dimensions : 21.59 x 13.97 x 2.02 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 1 count
Importer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd., 4/19, Asaf Ali Raod, New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Packer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Generic Name : Book
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