BAKRI AUR BHEDIYA (बाल विकास: प्रेरणादायक और नैतिक कहानियाँ) (Hindi Edition)

BAKRI AUR BHEDIYA (बाल विकास: प्रेरणादायक और नैतिक कहानियाँ) (Hindi Edition)
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(as of Mar 05,2025 02:16:00 UTC – Details)

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BAKRI AUR BHEDIYA BY ANUSHKA

BAKRI AUR BHEDIYABAKRI AUR BHEDIYA

“काफी पुरानी बात है, एक बूढ़ी बकरी रहती थी। उसके सात छोटे-छोटे बच्चे थे। एक दिन उसे जंगल से अपने बच्चों के लिए खाना लेने जाना था। जाने से पहले उसने अपने सातों बच्चों को बुलाया और कहा, ‘‘प्यारे बच्चो, मुझे जंगल जाना है। इसलिए जब मैं घर पर न रहूँ तो अपना ध्यान रखना। भेडि़ए से सावधान रहना। अगर वह आया तो तुम सब को खा जाएगा। उसके काले पैर और रूखी आवाज से उसे पहचानना।’’ बच्चों ने माँ की सलाह को ध्यान से सुना।” —पुस्तक से

JADUI SANGEETKARJADUI SANGEETKAR

JADUI SANGEETKAR

एक समय की बात है, एक व्यक्ति अपने गधे के साथ शहर में रहता था। गधा उस व्यक्ति के लिए दिन काम करता था, लेकिन अब बूढ़ा हो चुका था। इसलिए उस व्यक्ति को लगा कि वह उसकी आजीविका और नहीं चला सकता। गधा अपने मालिक की इस सोच से दुःखी हो वहाँ से भाग गया। रास्ते में उसे ब्रिमन शहर में एक संगीतकार बनने का विचार आया। थोड़ी सी दूर, उसने सड़क के किनारे एक शिकारी कुत्ते को लेटे हुए देखा। उसने उससे पूछा, ‘‘तुम यहाँ इस तरह क्यों लेटे हुए हो?’’ ‘‘क्योंकि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ और शिकार करने नहीं जा सकता, इसलिए मेरा मालिक मेरे साथ बुरा व्यवहार करता है, इसलिए मैं वहाँ से भाग निकला।’’ कुत्ते ने जवाब दिया।

EKTA KI TAKATEKTA KI TAKAT

EKTA KI TAKAT

“एक आदमी के पास एक गधा था, जो अपने मालिक का भारी बोझ ढोते-ढोते बूढ़ा हो गया। अब वह गधा भारी सामान नहीं ढो सकता था, इसलिए वह मालिक के लिए बोझ बन गया था। गधा भी अपने मालिक से परेशान हो गया। एक दिन गधा अपने मालिक को छोड़कर घर से निकल गया और शहर की ओर जानेवाली सड़क पर चल पड़ा। उसने सोचा कि वहाँ जाकर शहर का संगीतज्ञ बन जाऊँगा। अभी वह थोड़ा ही दूर चला था कि उसकी भेंट एक कुत्ते से हुई। कुत्ता सड़क पर पड़ा था।” —पुस्तक से

PAROPKARI TUKTUKPAROPKARI TUKTUK

PAROPKARI TUKTUK

बहुत समय पहले की बात है, एक महिला थी। उसकी बड़ी इच्छा थी कि उसका अपना बच्चा होता, लेकिन उसकी यह इच्छा कभी पूरी नहीं हुई। अंत में उसने एक परी को अपनी यह इच्छा बताई। परी ने उसे एक बीज दिया। उसने परी के दिए हुए उस बीज को बो दिया। कुछ दिनों बाद वह बीज बड़ा होकर फूल बन गया। उस फूल में उसे एक नन्ही-सी बच्ची मिली, जिसकी लंबाई मुश्किल से अँगूठे की आधी होगी। इसलिए उस महिला ने उस बच्ची का नाम ‘टुकटुक’ रखा।

BOTTLE KA JINNBOTTLE KA JINN

BOTTLE KA JINN

एक बार की बात है, एक गरीब लकड़हारा था। उसने अपने लड़के को पढ़ने के लिए उच्च विद्यालय भेजा। लड़का पढ़ाई में बड़ी मेहनत करता था, ताकि शिक्षक उसकी प्रशंसा करें। जब उसने लगातार दो कक्षाओं में मेहनत की, लेकिन फिर भी हर विषय में दक्ष नहीं हो सका। उसके पिता ने जो कुछ कमाया था, सब खर्च हो गया, तो लड़का घर वापस लौट आने को मजबूर हो गया। लकड़े के पिता ने उससे कहा, ‘‘अब मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दे सकता। इस मुश्किल वक्त में मैं रोज की दाल-रोटी से ज्यादा कुछ कमा ही नहीं पा रहा हूँ।’’ लड़के ने कहा, ‘‘पिताजी, आप चिंता न करें, जब मेरा भाग्य होगा तो मैं फिर पढ़ने चला जाऊँगा।’’ अब पिता पैसे कमाने के लिए जंगल में जाना चाहते थे, लड़के ने कहा, ‘‘मैं भी आपके साथ जाऊँगा और आपकी मदद करूँगा।’’ पहले तो पिता ने मना कर दिया, फिर वह पड़ोस से एक कुल्हाड़ी माँगकर ले आया। तब वे दोनों पैसे कमाने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। —पुस्तक से

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