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Hausale Ki Oonchi Udaan

सफलता के लिए आवश्यक सूत्रों को भी रेखांकित करता अत्यंत पठनीय उपन्यास।
‘हौसले की ऊँची उड़ान’ सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने की गौरवगाथा भर नहीं है, यह सलाम है उस जीवटता को, जो मनुष्य को सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ पशु बनाती है। ‘हौसले की ऊँची उड़ान’ वह दृढ़ता है, जो मनुष्य को असाध्य चुनौती को साधने की प्रेरणा और हिम्मत देती है। ‘हौसले की ऊँची उड़ान’ साहित्य से भी पहले एक भोगा हुआ यथार्थ है और यदि इस यथार्थ की सर्जना के क्रम में किसी को साहित्य की प्राप्ति होती है तो मैं अपने आप को धन्य मानूँगा। इसमें प्रेम भी है और तड़प भी। संघर्ष भी है तो रस भी, कुटिलता भी है तो जिजीविषा भी, कमल और गुलाब है तो कीचड़ भी, जीवन के किसी भी रंग द्वारा अपने सफेद अंगवस्त्र को रँगने से मैं बचा नहीं पाया हूँ। इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का महिमामंडन नहीं है, उद्देश्य है युवाओं को कर्तव्यपथ पर पूरी लगन के साथ चलने के लिए प्रेरित करना। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद यदि एक युवा भी अपने धुँधले पड़ गए लक्ष्य की ओर चलने के लिए प्रेरित होता है तो मैं मानूँगा कि मैं अपने उद्देश्य में सफल रहा।इस पुस्तक को पढ़ने के बाद साहित्य के शास्त्रीय सिद्धांतों के चितेरे कुछ सुधी आलोचक नाक-भौंह सिकोड़ सकते हैं, मेरे द्वारा साहित्य को हुई हानि के लिए मैं उनसे करबद्ध क्षमा माँगता हूँ। नवीन परिस्थितियों को कागज पर उकेरने के लिए नए औजारों की आवश्यकता पड़ती ही है और मैंने भाषा और शिल्प के स्तर पर उन्हीं प्रतिमानों का प्रयोग किया है, जो इस उपन्यास को प्रासंगिक बना सकें। साहित्य और साहित्य के उद्देश्य के बीच में मुझे जहाँ भी चुनना पड़ा है, मैंने उद्देश्य को ही प्राथमिकता दी हैरोजगार और साहित्य सृजन के बीच में कोई द्वंद्व न हो, इसलिए मैंने महीनों देर रात तक अपने मस्तिष्क का तेल जलाया है, तब जाकर यह रचना आप सबके समक्ष रख पाया हूँ।पिछले कुछ महीनों में अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ बनीं, जब लगा कि यह रचनाकर्म पूर्ण नहीं हो पाएगा, लेकिन उन परिस्थितियों में भी उसी जीवटता ने मेरा मार्गदर्शन किया था, जो इस रचना का मर्म है। मैं स्वाति और अहाना को उनके धैर्य के लिए धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने मेरी व्यस्तता के दौर में भी मेरा सहयोग किया।

Surendra Mohan
श्री सुरेंद्र मोहन 2010 बैच के भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं तथा अभी संयुक्त आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश में जनमे और बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आनेवाले श्री सुरेंद्र मोहन के पिता सिविल न्यायालय में मुंशी के रूप में कार्यरत थे। चार भाई-बहनों में वे अपने माता-पिता की द्वितीय संतान हैं। वे ‘लोक प्रशासन’ विषय में लखनऊ विश्वविद्यालय से आर.एस. गोपाल गोल्ड मेडल के साथ परास्नातक हैं। साथ-ही-साथ आप ‘नालसर विश्वविद्यालय’ से ‘बिजनेस लॉ तथा टेक्सेशन’ में भी परास्नातक हैं। श्री सुरेंद्र मोहन लोक प्रशासन विषय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ ‘जूनियर रिसर्च फैलोशिप’ भी अपने प्रथम प्रयास में ही प्राप्त कर चुके हैं। अपने कार्यक्षेत्र के साथ-साथ उन्हें साहित्य के क्षेत्र में भी खासी रुचि रही है। वे लेखक के साथ ही कवि, अध्यापक और आलोचक भी हैं। ‘हौसलेकी ऊँची उड़ान’ उनकी पहली प्रकाशित कृति है।
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Hausale Ki Oonchi Udaan
दिसंबर की कड़कती सर्द रात में कोहरे से दिशाओं का ज्ञान लुप्त हो रहा था। हाँड़ कँपा देनेवाली ठंड मांस को चीरकर हड्डियों में एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रही थी। सामने की सड़क यूँ तो शहर की मुख्य और व्यस्ततम सड़कों में से एक थी, लेकिन सर्द थपेड़ों ने उसे ऐसे सुनसान कर दिया था, जैसे सारा शहर लिहाफों में दुबका पड़ा हो। रात के दस बजने को थे और ठंड का रौद्र रूप हर पल भयानक होता जा रहा था। सामने केवल दस मीटर की दूरी पर स्थित सुखदेई होटल कोहरे की चादर में पूरी तरह लुप्त हो गया था। लोहे की चादर का बना पी.सी.ओ. केबिन बाहर से भी ज्यादा ठंडा और शुष्क था और उसमें बिल मशीन के सामने बैठे मोहन को खुद को गरम रखने की जरूरत और शिद्दत से महसूस होने लगी थी।

Hausale Ki Oonchi Udaan
मोहन को प्रारंभिक परीक्षा देकर सीतापुर वापस आए हुए दो-तीन दिन हो चुके थे। मोहन ने निर्णय लिया कि अगले एक सप्ताह तक वह अपने मस्तिष्क और शरीर दोनों को आराम देगा और उसके बाद पुनः सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुटेगा। घर से बाहर सैर को निकले हुए कई महीने हो गए थे, इसलिए एक शाम वह घर से बाहर खुली हवा का लुत्फ लेने निकला। गुलाबी शाम एक खुमार साथ लिये हुए छाई थी और हलकी-हलकी सी ठंडी हवा मस्तिष्क को सुकून दे रही थी।

Hausale Ki Oonchi Udaan
प्रारंभिक परीक्षा समीप आती जा रही थी, साथ ही एम.पी.ए. द्वितीय वर्ष का परिणाम आने का समय भी निकट आ रहा था। इस परिणाम के बाद ही मोहन पी-एच.डी. में प्रवेश ले सकेगा और तत्पश्चात् ही उसकी फेलोशिप मिलनी प्रारंभ होगी। प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी जोरों पर थी। सामान्य अध्ययन के हर खंड का अच्छे से अध्ययन किया जा चुका था। आत्मविश्वास भी बढ़ता जा रहा था, लेकिन फिर भी रह-रहकर यू.पी.एस.सी. की गुगली का डर मोहन के हृदय में बैठा हुआ था। विधानसभा के समीप एक स्कूल में मोहन का परीक्षा केंद्र था। परीक्षा से पहले की रात मोहन काफी देर से सोया था। आँखों से नींद कोसों दूर थी। दो बार की असफलता रह-रहकर हृदय में संशय उत्पन्न कर रही थी, लेकिन विश्वविद्यालय की परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन तथा नेट-जे.आर.एफ. की पात्रता उसका उत्साहवर्धन भी कर रही थी।

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Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.; 1st edition (29 August 2021); Prabhat Prakashan Pvt. Ltd., 4/19, Asaf Ali Raod, New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Language : Hindi
Paperback : 200 pages
ISBN-10 : 9355210027
ISBN-13 : 978-9355210029
Item Weight : 150 g
Dimensions : 20.32 x 12.7 x 1.27 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 1 Count
Importer : (PH: 7827007777)
Packer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.,
Generic Name : Book
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