Bharatiya Sanskriti Ka Samvahak Indonesia: The Cultural Ties between India and Indonesia (Hindi Edition)

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Bharatiya Sanskriti Ka Samvahak Indonesia by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Bharatiya Sanskriti Ka Samvahak Indonesia by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’Bharatiya Sanskriti Ka Samvahak Indonesia by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

इस कृति से दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के निकट आने में मदद मिलेगी।

हजारों साल बाद भी भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप देखना है तो इंडोनेशिया जाना चाहिए। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर और विशिष्ट संस्कृतिवाला इंडोनेशिया बड़े वर्ग को आकर्षित करता है। न केवल इंडोनेशिया ने अपने को भारत की अमर सनातन संस्कृति से जोड़ा है, बल्कि उसे समृद्ध बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।धर्म, संप्रदाय, भाषा, क्षेत्र और जाति की परिधि में अपने को समेटकर हम लालच में पड़कर नैतिकता को छोड़ पतन की तरफ जा रहे हैं। ऐसे में इंडोनेशिया ने न केवल भारतीय संस्कृति को सहेजकर रखा है, बल्कि उसे संरक्षित, संवर्धित करने में सफलता पाई है।इस पुस्तक में इंडोनेशिया-भारत की प्रगाढ़ मित्रता, सामरिक साझेदारी का उल्लेख है, वहीं इंडोनेशिया के भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक पक्ष को सुधी पाठकों के समक्ष रखा है। इसमें इंडोनेशिया की संस्कृति, शिक्षा, परंपराओं, इतिहास और इस देश की विकास की कहानी को पाठकों से साझा किया गया है।बदलते विश्व परिदृश्य में भारत-इंडोनेशिया की सामरिक मित्रता, बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ एशिया में इंडोनेशिया-भारत की बढ़ती भूमिका और दक्षिण-पूर्व प्रशांत क्षेत्र में विश्व शांति की स्थापना में दोनों देशों की साझी नीतियों और उनके योगदान की चर्चा की है।

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Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

जन्म : वर्ष 1959

स्थान : ग्राम पिनानी, जनपद पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)।

साहित्य, संस्कृति और राजनीति में समान रूप से पकड़ रखनेवाले डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कहानी, कविता, उपन्यास, पर्यटन, तीर्थाटन, संस्मरण एवं व्यक्तित्व विकास जैसी अनेक विधाओं में अब तक पाँच दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।

उनके साहित्य का अनुवाद अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच, जर्मन, नेपाली, क्रिओल, स्पेनिश आदि विदेशी भाषाओं सहित तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, बांग्ला, मराठी आदि अनेक भारतीय भाषाओं में हुआ है। साथ ही उनका साहित्य देश एवं विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। कई विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर शोध कार्य हुआ तथा हो रहा है। उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए देश के चार राष्ट्रपतियों द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्मानित। विश्व के लगभग बीस देशों में भ्रमण कर उत्कृष्ट साहित्य सृजन किया। गंगा, हिमालय और पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन हेतु सम्मानित।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद तथा लोकसभा की सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति के सभापति।

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ASIN ‏ : ‎ B0845P76RJ
Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan (24 January 2020)
Language ‏ : ‎ Hindi
File size ‏ : ‎ 6144 KB
Text-to-Speech ‏ : ‎ Enabled
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Enhanced typesetting ‏ : ‎ Enabled
Word Wise ‏ : ‎ Not Enabled
Print length ‏ : ‎ 161 pages

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