Kabeer Dohawali (A Collection Inspiring Urdu Couplets ( Dohe Books in Hindi)

Kabeer Dohawali (A Collection Inspiring Urdu Couplets ( Dohe Books in Hindi)
Price: ₹300 - ₹202.00
(as of Jan 27,2025 03:44:00 UTC – Details)

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Kabeer Dohawali by Neelotpal

Kabeer Dohawali by Neelotpal Kabeer Dohawali by Neelotpal

महात्मा कबीर अपनी कालजयी रचनाओं के कारण युगों-युगों तक हमारे बीच उपस्‍थ‌ित रहेंगे। कबीर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे।

सामान्य तरीके से जन्म लेकर और एक अति सामान्य परिवार में पलकर कैसे महानता के शीर्ष को छुआ जा सकता है, यह महात्मा कबीर के आचार, व्यवहार, व्यक्‍त‌ि‍त्व और कृतित्व से सीखा जा सकता है। कबीर ने कोई पंथ नहीं चलाया, कोई मार्ग नहीं बनाया; बस लोगों से इतना कहा कि वे अपने विवेक से अपने अंतर्मन में झाँकें।कबीर मूर्ति या पत्‍थर को पूजने की अपेक्षा अंतर में बसे प्रभु की भक्‍त‌ि करने पर बल देते थे। 1 4 वीं सदी में कबीर दलितों के सबसे बड़े मसीहा बनकर उभरे और उच्च वर्गों के शोषण के विरद्ध उन्हें जागरूक करते रहे। वह निरंतर घूम-घूमकर जन-जागरण चलाते और लोगों में जागृति पैदा करते थे। ‘रमैनी’, ‘सबद’ और ‘साखी’ में उन्होंने अंधविश्‍वास, वेदांत तत्त्व, धार्मिक पाखंड, मिथ्याचार, संसार की क्षणभंगुरता, हृदय की शुद्धि, माया, छुआछूत आदि अनेक प्रसंगों पर बड़ी मार्मिक उक्‍त‌ियाँ कही हैं।महात्मा कबीर अपनी कालजयी रचनाओं के कारण युगों-युगों तक हमारे बीच उपस्‍थ‌ित रहेंगे। उनकी वाणी का अनुसरण करके हम अपना वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी सँवार सकते हैं। कबीर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे।प्रस्तुत पुस्तक में, वर्तमान प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर ही, संत कबीर की जीवनी और काव्य-रचना के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि पाठकों को कबीर को समझने और उनके दरशाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल सके।

अनुक्रम

अपनी बातजन्म और नामकरणबाल लीलाएँवैवाहिक जीवनशिक्षा और उपदेशना काहू से वैरकाव्य-संसारपंचतत्त्व से मेलकबीर के दोहेकबीर के पद

Tulsi Dohawali by Raghav 'Raghu'Tulsi Dohawali by Raghav 'Raghu'

Tulsi Dohawali by Raghav ‘Raghu’

अल्पायु में माता के निधन ने उन्हें अनाथ कर दिया। उन्हें भिक्षाटन करके जीवन-यापन करना पड़ा। धीरे-धीरे वह भगवान् श्रीराम की भक्‍त‌ि की ओर आकृष्‍ट हुए। हनुमानजी की कृपा से उन्हें राम-लक्ष्मण के साक्षात् दर्शन का सौभाग्य प्राप्‍त हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना आरंभ की। ‘रामलला नहछू’; ‘जानकीमंगल’; ‘पार्वती मंगल’; ‘कवितावली’; ‘गीतावली’; ‘विनयपत्रिका’; ‘कृष्‍ण गीतावली’; ‘सतसई दोहावली’; ‘हनुमान बाहुक’ आदि उनके प्रसिद्ध ग्रंथ हैं।

Raheem Dohawali by Ed. VagdevRaheem Dohawali by Ed. Vagdev

Raheem Dohawali by Ed. Vagdev

रहीम अर्थात् अब्दुर्रहीम खानखाना को अधिकतर लोग कवि के रूप में जानते है; लेकिन कविता ने उनका दूसरा पक्ष आवृत कर लिया हो; ऐसा नहीं है। रहीम का व्यक्‍त‌ि‍त्व बहुआयामी था। एक ओर वे वीर योद्धा; सेनापति; चतुर राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे तो दूसरी ओर कवि-हृदय; कविता-मर्मज्ञ; उदार चित्त; उत्कट दानी; मानवीयता आदि गुणों से ओत-प्रोत थे। रहीम का जीवन तीव्र घटनाक्रमों से भरा रहा। चार वर्ष की उम्र में पिता असमय बिछड़ गए। तीन पुत्र युवावस्‍था में ही एक-एक कर गुजर गए। एक धर्मपुत्र फहीम युद्ध में मारा गया।

SOOR PADAWALI BY VAGDEVSOOR PADAWALI BY VAGDEV

SOOR PADAWALI BY VAGDEV

कृष्‍ण-भक्‍त‌ि शाखा के कवियों में महाकवि सूरदास का नाम शीर्ष पर प्रति‌षष्‍ठ‌ित है। अपनी रचनाओं में उन्होंने अपने आराध्य भगवान् श्रीकृष्‍ण का लीला-गायन पूरी तन्मयता के साथ किया है। घनश्‍याम सूर के रोम-रोम में बसते हैं। गुण-अवगुण; सुख-दुःख; राग-द्वेष लाभ-हानि; जीवन-मरण—सब अपने इष्‍ट को अर्पित कर वे निर्लिप्‍त भाव से उनका स्मरण-सुमिरन एवं चिंतन-मनन करते रहे। सूदासजी मनुष्यमात्र के कल्याण की भावना से ओतप्रोत रहे। उनके अप्रयत्यक्ष उपदेशों का अनुकरण करके हम अपने जीवन को दैवी स्पर्श से आलोकित कर सकते हैं

Meera Padawali by Ed.NilotpalMeera Padawali by Ed.Nilotpal

Meera Padawali by Ed.Nilotpal

सगुण भक्‍त‌ि-धारा के कृष्‍ण-भक्तों में मीराबाई का श्रेष्‍ठ स्‍थान है। वे श्रीकृष्‍ण को ईश्‍वर-तुल्य पूज्य ही नहीं; वरन् अपने पति-तुल्य मानती थीं। कहते हैं कि उन्होंने बाल्यावस्‍था में ही श्रीकृष्‍ण का वरण कर लिया था। माता-पिता ने यद्यपि उनका लौकिक विवाह भी किया; लेकिन उन्होंने पारलौकिक प्रेम को प्रश्रय दिया तथा पति का घर-बार त्यागकर जोगन बन गईं और गली-गली अपने इष्‍ट; अपने आराध्य; अपने वर श्रीकृष्‍ण को ढूँढ़ने लगीं। उन्होंने वृंदावन की गली-गली; घर-घर; बाग-बाग और पत्तों-पत्तों में गिरधर गोपाल को ढूँढ़ा; अंततः जब वे नहीं मिले तो द्वारिका चली गईं। मीराबाई ने अनेक लोकप्रिय पदों की रचना की। हालाँकि काव्य-रचना उनका उद‍्देश्य नहीं था।

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Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan (1 January 2020); Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Language ‏ : ‎ Hindi
Paperback ‏ : ‎ 160 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 9390101123
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9390101122
Item Weight ‏ : ‎ 200 g
Dimensions ‏ : ‎ 20.3 x 25.4 x 4.7 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Net Quantity ‏ : ‎ 1 Count
Importer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan – Delhi
Packer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan – Delhi
Generic Name ‏ : ‎ Books

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