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Amar Suktiyan by Jayshri

अत्यंत पठनीय, व्यावहारिक व संग्रहणीय सूक्तियों का संग्रह।
सूक्त वचन ज्ञान का सार होते हैं। हमारे मनीषियों, विद्वानों, महापुरुषों, नीतिज्ञों के अनुभव, दर्शन और परिपक्व विचारों से हमारा जीवनपथ प्रशस्त होता है। सूक्तियाँ हमारी मानसिकता व विचारों का निर्माण करती हैं। अनेक अवसरों व परिस्थितियों में ये किसी सुहृद् मित्र की भाँति हमारा पथ-प्रदर्शन करती हैं। जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णयों की पूर्व-पीठिका तैयार करती हैं। सूक्त वचनों की महानता, महत्ता एवं उपयोगिता को देखते हुए प्रस्तुत कृति तैयार की गई है। जीवन के आध्यात्मिक विकास एवं तात्त्विक भाव उत्पन्न करने में सहायक प्रेरणाप्रद पुस्तक।

Jayshri
डॉ. जयश्री का जन्म वाराणसी में हुआ। आपने रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली (उ.प्र.) से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पटना विश्वविद्यालय, पटना से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट किया है। आप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जूनियर एसोसिएट फैलो एवं नेट (NET) उत्तीर्ण हैं।कृतित्व : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ तथा दो पुस्तकें—‘खिलाडि़यों के मुख से’ एवं ‘मसालों का औषधीय महत्त्व’ प्रकाशित।
अन्य प्रसिद्ध कृतियां।

SANTON KE PRERAK PRASANG
हमारा देश संत-महात्माओं एवं ऋषिमुनियों का देश है। उनकी सांसारिक पदार्थों में आसक्ति नहीं होती। वे सिर्फ जीने भर के लिए जरूरी चीजों का सीमित मात्रा में उपभोग करते हैं। क्रोध; मान; माया और लोभ से संत का कोई प्रयोजन नहीं है। ऐसा सात्त्विक तपस्वी जीवन सबके लिए अनुकरणीय होता है।

Bharat Ke Mahan Sant
संतों की संस्कृति वेदना-संवेदना की संस्कृति है; यथार्थ की धरती पर अवतरित अध्यात्मभाव की संस्कृति है। घोर कष्टों; संकटों; अभावों और घोर अपमानों को सहकर दूसरों को उठाने; खड़ा करने और उन्हें सद्मार्ग दिखाने का महाकर्म है— संतों का जीवन।

Sant Kathayen Marg Dikhayen
समाज में व्यभिचार, हिंसा, ईर्ष्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसा नहीं है कि मनुष्यों के अंदर पलनेवाले इन दुर्भावों को नहीं रोका जा सकता, अवश्य रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए आवश्यकता है ऐसी कथाओं की, जो व्यक्तियों को कम समय में एक बड़ी शिक्षा दें और उन्हें भँवर से बाहर निकालें।

Bharatiya Sanskriti ke Rakshak Sant
इस राजनीतिक पराभव काल में भारत के महान् संतों ने संपूर्ण भारत के गाँव-गाँव में हिंदू जनता को सामाजिक; सांस्कृतिक; धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे स्वनामधन्य पूज्यपाद संतों व उनके जीवन चरित का उल्लेख किया गया है; जिनके कारण भारतीय संस्कृति आज भी संरक्षित है।
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ASIN : B01MCZCKMH
Publisher : Prabhat Prakashan (27 February 2021)
Language : Hindi
File size : 275 KB
Text-to-Speech : Enabled
Screen Reader : Supported
Enhanced typesetting : Enabled
Word Wise : Not Enabled
Print length : 76 pages
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