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Gyaneshwari Prasad By “Suresh Sadashiv Joshi ”

Gyaneshwari Prasad’ Theology & Philosophy of Religion”
हम सभी भारतवासी बड़े ही भाग्यशाली हैं कि हमें श्रीमद्भगवद्गीता जैसी श्रेष्ठ चिंतन-संपदा प्राप्त हुई है।
हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश श्रोता-पाठक वर्ग को आज भी उतने ही प्रासंगिक लगते हैं। इस पवित्र ग्रंथ में प्रस्तुत किए गए चिंतन का विश्लेषण कर सुधीजनों हेतु उपलब्ध कराने का श्रेष्ठ कार्य अनेक महानुभावों ने अपनी-अपनी शैली से किया है। इस शृंखला में ज्ञानेश्वरी का अपना विशेष स्थान है। अत्यंत जटिल, कठिन चिंतन को अत्यंत सरल भाषा में, नित्य अनुभव में आनेवाले दृष्टांतों के साथ और तर्कशुद्ध पद्धति से संत ज्ञानेश्वर ने प्रस्तुत किया है। मुख्यतः ज्ञानेश्वरी और पू. स्वामी चिन्मयानंद के व्याख्यानों के संग्रह के आधार पर प्रस्तुत संकलन न विश्लेषण है, न समीक्षात्मक विवेचन। यह अनेकानेक महानुभावों द्वारा प्रस्तुत की गई
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Vedic Vichar (hindi) Paperback
यह पुस्तक अपने में चारों वेदों के ज्ञान का अमृत समेटे हुए है। यह उन लोगों को अवश्य पढ़नी चाहिए, जो अपने जीवन को एक अर्थ देना चाहते हैं।
जीवन तनावों से भरा हुआ है। काम और घर में पिसते हुए व्यक्ति के लिए शांति की तलाश बहुत ही अहम है। मोक्ष के लिए प्रार्थनाएँ और ईश्वर को प्राप्त करने का मार्ग अति आवश्यक है। इस पुस्तक में ब्रिगेडियर चितरंजन सावंत (सेवानिवृत्त) ने अपनी 50 वर्षों की सार्वजनिक वार्त्ताओं के माध्यम से समाज के अंधविश्वासों एवं पारंपरिक धार्मिक समारोहों से हटकर जीवन के वैदिक मार्ग पर चलने का आह्वान किया है।

Gyaneshwari Prasad
हम सभी भारतवासी बड़े ही भाग्यशाली हैं कि हमें श्रीमद्भगवद्गीता जैसी श्रेष्ठ चिंतन-संपदा प्राप्त हुई है।
हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश श्रोता-पाठक वर्ग को आज भी उतने ही प्रासंगिक लगते हैं। इस पवित्र ग्रंथ में प्रस्तुत किए गए चिंतन का विश्लेषण कर सुधीजनों हेतु उपलब्ध कराने का श्रेष्ठ कार्य अनेक महानुभावों ने अपनी-अपनी शैली से किया है। इस शृंखला में ज्ञानेश्वरी का अपना विशेष स्थान है। अत्यंत जटिल, कठिन चिंतन को अत्यंत सरल भाषा में, नित्य अनुभव में आनेवाले दृष्टांतों के साथ और तर्कशुद्ध पद्धति से संत ज्ञानेश्वर ने प्रस्तुत किया है। मुख्यतः ज्ञानेश्वरी और पू. स्वामी चिन्मयानंद के व्याख्यानों के संग्रह के आधार पर प्रस्तुत संकलन न विश्लेषण है, न समीक्षात्मक विवेचन।

Srimad Bhagavad Gita by Kamakshi Dasa
The Gita is set in a narrative framework of a dialogue between Pandava prince Arjuna and his guide and charioteer Krishna.
At the start of the Dharma Yudhha (righteous war) between Pandavas and Kauravas, Arjuna is filled with moral dilemma and despair about the violence and death the war will cause in the battle against his own kin. He wonders if he should renounce and seeks Krishna’s counsel, whose answers and discourse constitute the Bhagavad Gita. Krishna counsels Arjuna to “fulfill his Kshatriya (warrior) duty to uphold the Dharma” through “selfless action”.

JAGADGURU SHRI SHANKARACHARYA
संत परंपरा ही संपूर्ण विश्व को तमाम विघ्न-कष्टों से बचाकर वास्तविक विकास के मार्ग पर अग्रसर कर सकती है।
शंकराचार्य ने समस्त हिंदू-राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने एवं उसे संगठित करने का प्रयास किया। देश के चारों कोनों पर चार धामों के प्रति श्रद्धा केंद्रित करते हुए उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष की, मातृ-भू की मूर्ति जन-जन के हृदय पर अंकित कर दी।
ASIN : B08KCWBW85
Publisher : Prabhat Prakashan (29 September 2020)
Language : Hindi
File size : 874 KB
Text-to-Speech : Enabled
Screen Reader : Supported
Enhanced typesetting : Enabled
Word Wise : Not Enabled
Print length : 116 pages
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